Author: Ramesh Sharma

मोम सा तन प्राण ज्योित,पल पल जीवन पिघल रहा है

माया,झूठ और फरेब के सहारे ये जग चल रहा है।
मोम सा तन,प्राण-ज्योति पल पल जीवन पिघल रहा है।।
नकली चेहरे लगाये, मुह पे मुस्कान लिए, दुकान बैठे हैं ।
मोम सा तन ,प्राण-ज्योति पल पल जीवन पिघल रहा है।।
धमर् की आड़ लिए, मिथ्या ज्ञान लिए दरबार लेके बैठे हैं।।
मोम सा तन प्राण-ज्योति पल पल जीवन पिघल रहा है।।
दिन-रात करें कुकमर्,मन में है पर्भु खौफ, मंदिर में बैठे हैं।
मोम सा तन प्राण-ज्योति पल पल जीवन पिघल रहा है।।
दिल में है खोट,आत्मा रही कचोट,अंत समय आता देख।
मोम सा तन प्राण-ज्योति पल पल जीवन पिघल रहा है।।
क्यों तू करे अिभमान,जा सद्गुरु शरण,ले ले नाम मंतर्।
मोम सा तन प्राण-ज्योति पल पल जीवन पिघल रहा है।।
धन दौलत शान शौकत, बंधु सुत दारा सब यहीं रह जाते।
मोम सा तन प्राण-ज्योति पल पल जीवन पिघल रहा है।।

बीबी साली दोनों खड़ी ,कांटे लागूं पाय।

बीबी साली दोनों खड़ी,कांटे लागूं पाय।
बलिहारी है बेलन की , बीबी दियो बताय।।

मन वैरी तू बावरा ,इत उत कूं काहे भटकाय।
तन बेचारा मन से कहें, क्यों मोकूं पिटवाय।।

काया तेरी हुई कंकाल सी,मन तेरा हुआ जवान।
मुड़ मुड़ पाछे देखता रहे, तेरी बुद्धि क्यों भरमाय।।

सुंदर साली की मुस्कान,दिल पर कटार चलाय।
ज्यों ही प्रेम में आगे बढ़े, आंखों में पत्नी छाय।।

कवि की ऐसी कल्पना क्यों बार बार ललचाय।
जाने कब की दुश्मनी हमसे कविता लिखवाय।।

एक तरफ कुआं गहरा दूसरी तरफ है खाई।
लिखें कविता तो पिटें ना लिखें तो धमकाय।।

माखन चोर

अरे माखन की चोरी छोड़,
श्याम रे मैं समझाऊं तोय।
नन्द बाबा के कहा कमी,
जो माखन ढूंढे चहूं ओर।1।

ग्वाल बाल संग गाय चरावै,
रोज रोज शिकायत आवै।
गांव की ग्वालिन करें छिछौरी,
फिर मार पड़ेगी तोय ।2।

तोय मारूं तो जी दुःख पावे,
रोज के ताने सुने ना जावे।
तेरी मति कूं का हे गयो,
तू क्यों सतावे मोय । 3।

तेरे बिन मोय चैन ना आवे,
तू रुठ जाय तो मन घबराबे।
जितनो माखन खानो होय ,
मैं अपने घर दूंगी तोय।4।

प्यारो सो मेरो कृष्ण कन्हैया,
हाथ जोड़ करै विनती मैय्या।
नटखट मोहन यू मुसकावै,
कैसो आनंद को दृश्य होय।5।

सूर दास जाके गुण गावे,
बिन नैनन के दर्शन पावे।
ऐसी कृपा करी मेरे मोहन,
क्यों न भजूं मैं तोय। 6।

सांझ आज फिर मिलने आई

नील गगन में बदली छाई,
धूप गयी अंधियारी छाई।
पंछी लौट चले अपने घर को ,
सांझ आज फिर मिलने आई।।

ठंडी बयार चली पुरवा की,
कोयल मीठे स्वर में गाई।
पेड़ झूम रहे मस्त बागों में,
सांझ आज फिर मिलने आई।।

दो प्रेमी बैठे सूने झुरमुट में,
लीन हुए प्रिया और प्रीतम।
प्रेम की बातें सुन प्रिया मुस्काई
सांझ आज फिर मिलने आई।।

जीवन रुपी इस बगिया में ,
जब जब यहां कली मुरझाई।
देख चांद की धवल रोशनी ,
सांझ आज फिर मिलने आई।।

मन ही मन बैठी सोचती मैं,
जीवन निकल गया संघर्ष में।
उम्र ढली कुछ पल खुद में झांकूं,
सांझ आज फिर मिलने आई।।

लगा दिया जीवन परवरिश में,
जिनको पाल रही मैं संघर्ष में।
छोड़ गए जीवन के इस मोड़ पर,
सांझ आज फिर मिलने आई।।

बाहर मुस्कुराता हूं अंदर ही अंदर

बाहर मुस्कुराता हूं मैं ,
अंदर ही अंदर गम पालें हैं।
बेवफाई का हुआ असर,
दिल में छाले ही छाले हैं।।

लाख धोया दामन को,
मगर दाग धुल ने सके।
अपनों के दिये सितम,
से मुंह पे ताले ही ताले हैं।।

जिंदगी भी हमें अब एक,
बोझ ही दिखाई देती है।
अपना घर अंधेरे में डूबा है,
बाहर उजाले ही उजाले हैं।।

मुश्किलों ने घर देख लिया,
जब चाहे चली आती हैं।
एक हल होती नहीं तब तक,
घर में ढेरों डेरा डालें हैं।।

उम्मीद किससे करें भला,
अपने भी बने न्यारे हैं।
एक ईश्वर के आसरे ही,
हमने सब गम संभाले हैं।।

आंखों में समंदर है

तेरी आंखों में समंदर दिखाई देता है।
ये हसीन चेहरा उदास दिखाई देता है।।

झुकी हुई सी निगाहें बयां करती है।
गमों का दरिया बहता दिखाई देता है।।

हमारे इश्क पे फिर से सवाल उठा होगा।
यह खामोशी का असर दिखाई देता है।।

हर मुश्किल से निकलना कहां आसां है।
यहां मुश्किलों का पहाड़ दिखाई देता है।।

हैं अगर उस पे यकीं तो फिक्र क्यों है।
उसपे सवाल का जवाब दिखाई देता है।।

जिंदगी भर कदम पर इम्तिहान लेती है।
वो हौसलों से हारा हुआ दिखाई देता है।।

जानों मुझे

मैं वो नहीं हूं गौर से पहचानों मुझे,
अभी भी वक्त है देखो जानों मुझे।
बेवफाई करना हमारे खून में नहीं,
खुद मोहब्बत करके जानों मुझे।।

ये आग मोहब्बत की जलती रही,
आग में भस्म होने बचा लो मुझे।
मैं तेरे कूचे पे मांगने नहीं जाऊंगा,
इश्क है तो मिल करके मानो मुझे।।

मैंने उसकी इस अभी नहीं छोड़ी है,
अपने बाजुओं में समा लो मुझे।
ज़माने भर की सही तेरी खातिर,
इतना बता करके न पहचानो मुझे।।

तुम्हें इम्तिहान देना है मैं हाज़िर हूं,
गैरों के कहने से न टालो मुझे।
मेरे जाने के बाद मेरी याद आएगी,
सफर भेज करके न जानो मुझे।।

दर्द उल्फत के बाजार में: रूसवाईयों का जनाजा

दर्द उल्फत को सरे बाजार करना हमें आता।
मेरी रूसवाईयों का जनाजा न गुज़र जाता।।

मैं भी सुकून से जी रहा होता जिंदगी को।
दर दर ठोकरें खाता हुआ नहीं नजर आता।।

कब से इंतजार कर रहा हूं इन खुशियों का।
कोई मेरे दरवाजे पे अच्छी खबर नहीं लाता।।

वो न आएं उनकी खबर तो हम तक आए ।
मेरी उल्फत का पैगाम उन तक पहुंच जाता।।

अब तो तन्हाईयां कचोटती हैं मुझे रातभर।
उन्हें याद किए बगैर दिन नहीं गुजर पाता।।

थक गया हूं मंजिल तक नहीं बढ़ते हैं कदम।
अंधेरी राहों में चिराग़ जलता नहीं नजर आता ।।

अंधेरे में भी रोशनी ढूंढते हैं

चंद लोग जीने का मुकाम ढूंढते हैं,
अंधेरे में भी लोग रोशनी ढूंढते हैं ।
ये दुनिया वो नहीं है जो दिखती है,
अंधेरे में भी लोग रोशनी ढूंढते हैं।।

जैसा हो नजरिया वहीं नजर आता,
किसी उजाले में अंधेरा नजर आता।
अच्छाई बुराई दोनों होती हैं सभी में,
अपने नज़रिए से लोग परख लेते हैं।।

कभी ये न सोचो लोग क्या कहेंगे,
उन्हें जो है कहना वो वही कहेंगे।
हमें लक्ष्य को पकड़ कर है चलना,
लोग चांद में भी दाग ढूंढते हैं।।

किसी से अपने दुख दर्द न कहिए,
पहले परखिए फिर दिल की कहिए।
भलाई का अब वो जमाना नहीं है,
खामोशियों से बस सब देखते रहिए।।

किसी को आप भला बुरा न कहिए,
जो मन को न भाए तो चुप रहिए।
जहां तक हो लोगों की मदद करिए,
किसी से कोई अपेक्षा न रख रखिए।।

मिलेगा

दिल में गिले शिकवे रखने से क्या मिलेगा।
बहने दे इसे आंसुओं में दिल हल्का मिलेगा।।

बहुत मुश्किल है आजकल रिश्ते संभालना।
किसी से कुछ कह दिया वहीं बहका मिलेगा।।

मोहब्बत बड़ी शिद्दत से देर तक निभाई हमने।
क्या जरुरी है कि बदले में तुझे वफा मिलेगा।।

सभी को अपना समझ न कह देना राज अपने।
वरना कल अखबार में तेरा अफसाना मिलेगा।।

हमने बड़ी मुश्किल से हासिल की है कामयाबी।
हर तरफ कोई न कोई दिल जलता हुआ मिलेगा।।

अब कहां हैं लोग दूसरों की खुशी में खुश होने वाले।
तू जहां से भी गुजरेगा चलता तेरा किस्सा मिलेगा।।